गठबंधन बनाम ठगबंधन

गठबंधन बनाम ठगबंधन 

पूरा अस्तबल बेचकर विषकन्या कांग्रेस घोड़े बेचके नहीं सो सकती।बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी ?लंका में सब बावन गज के हैं। भूकंप आते ही घोड़े अस्तबल से भाग जाएंगे। एक पखवाड़े के भीतर बहुमत सिद्ध करना है। कल शपथ ग्रहण समारोह के बाद मंत्रिपद का बंटवारा कब तक रोकेंगे। चार उचक्के चालीस चोर सांसदों वाली विषकन्या कोंग्रेस कब चैन की नींद लेगी इसका वर्तमान ठगबंधन में कोई निश्चय नहीं।  

आखिर चुनाव पूर्व गठबंधन का तो वर्तमान राज -नीतिक धंधे में प्रावधान है लेकिन ठगबंधन का कोई ज़िक्र नहीं है। यह ठगबंधन पूर्व में नेहरुपंथी अब विषकन्या कही जाने वाली कांग्रेस की मौलिक खोज है। 

करतम सो भोगतम। जो बोवोगे वही काटोगे। बोया पेड़ बबूल का तो छाँव कहाँ से पाय ?  

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